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आदिवासी ओझा जाति (Ojha Caste Definition)

bisau netam April 17, 2022

 

निम्नलिखित परिभाषाएं हैं आदिवासी ओझा (Ojha Caste Definition) जनजाति के बारे में- 

कुछ लोगों का मानना है एवं कुछ लेख में उल्लेख में मिला है  कि गांव में झाड़-फूंक करने वाले प्राय: ओझा जाति के ही लोग किया करते थे। जनजातियों के बहुत सारे देवी- देवता होते हैं उनकी  देखरेख करने की जिम्मेदारी,  प्रतिस्थापना करने की जिम्मेदारी, ओझा सिराहों को दिया गया। गांव में तबीयत खराब होना, या किसी को तकलीफ होना, उस समय के हकीम, बैगा, झाड़-फूंक करने वाले केवल एक ही जनजाति के लोग करते थे वे हैं ओझा ही जनजातियों के द्वारा समस्त ग्राम वासियों को झाड़-फूंक करना, शरीर के किसी स्थान पर चोट लगने पर जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करके उन्हें दवाई  देना, कई प्रकार के लोगों के शारीरिक रूप से अक्षम को सक्षम बनाने में सहयोग करते थे। इसलिए उन्हें ओझा कहा गया।

Ojha Caste Definition



इस पोस्ट में जानकारी है
1 आदिवासी ओझा (Ojha Caste Definition)
2 क्या ओझा जाति केवल भारत में ही है? या दूसरे देश में भी हैं?
3 ओझाओं का देवता कौन है ?(Who is the god of ojha shamanism?)
4 प्रसिद्ध ओझा (famous ojha shamans) भगत के नाम-
5 ओझा जाति किस कैटेगरी (ojha caste category) में आते हैं ?

हिंदू धर्म मान्यता अनुसार- शिव शंकर के वाद्य यंत्र को बजाने के कला केवल ओझा जनजातियों को ही है। इसकी जानकारी आदिवासी ओझा होने के कारण इतिहासकारों ने या कुछ कहें ब्राह्मणवाद को सपोर्ट करने वालों ने बातों को छुपाए रखें। इसलिए आज भी ब्राह्मण समुदाय में ओझा सरनेम, झा सरनेम का चलन देखने को मिल रहा है। 


हिंदू धर्म में उल्लेख किया गया है कि शिव जी के वाद्य यंत्र को देवनागरी लिपि में डमरु कहा जाता है। आदिवासी गोंड जनजातियों ने भी आदिवासी ओझा के कला से प्रभावित होकर हुल्की  नाम से सेम उसी प्रकार के वाद्य यंत्र का निर्माण किया और मनोरंजन के लिए उपयोग करने लगे। आज भी गोंड  जाति के लोग नवाखाई के पर्व में हुल्की नृत्य का आयोजन करते हैं।

ओम मंत्र के साथ ओझा डाहकी  धुन का मिलन होना ही ओझा शब्द की उत्पत्ति माना गया तभी से ओझा सरनेम भी ब्राह्मणों में आज भी लिखा जाता है साथ में झा सरनेम भी लिखा जा रहा है।


जबकि आदिवासी ओझा जनजातियों के मनोरंजन के मुख्य साधन प्रारंभिक तौर से डाहकी बजाते आ रहे है । डाहकी नाम पारसी शब्दों में कहा जाता है नोगना ,खोजरू ,खोजरी गीतों के साथ आज भी ओझा जनजातियों में हर घर में हर त्योहारों में मनोरंजन के लिए गीत के साथ डाहक बजाए जाता है। 


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क्या ओझा  जाति केवल भारत में ही है? या दूसरे देश में भी हैं? 

 

सामान्यतया ऊपर बताई गई परिभाषा अनुसार अच्छी और बुरी आत्माओं के बारे में जानकारी रखने वालों को ओझा जाति कहते हैं। अक्सर जनजातियों या पारंपरिक बिलों में या गांव में ओझाओं का प्रभाव ज्यादा होता है, और उन्हें धर्म और चिकित्सा दोनों का स्रोत माना जाता है। आज भी कोई इमरजेंसी होता है तो झाड़-फूंक करने के ओझाओं को आमंत्रित किया जाता है। 


ओझा जाति का अपना संस्कृति, अपनी भाषा, और अपना ही धर्म मानते हैं। विश्व में ओझा धर्म मानने वाले जिसे हम अंग्रेजी में ओझा धर्म (shamanism, शेमनिज़म) कहते हैं। 

साइबेरिया, अफ्रीका, मंगोलिया, मूल अमेरिकी आदिवासी समाज, जापान और भारत समेत ओझाओं  को विश्व भर में जनजातियों समाजों में देखा गया है।


ओझाओं का देवता कौन है ?(Who is the god of ojha shamanism?) 

वैसे तो आदिवासी ओझा प्राकृतिक पुजारी होते हैं, पेड़ ,पौधा, पशु ,पक्षियों का को पूजते हैं। विभिन्न देवी-देवताओं का ओझा जातियों में चलन है जो देवता  प्रमुख रूप से होते है उसमें बलि भी चढ़ाया जाता है।सामान्यतः डोकरा देव, आंगा देव, भूमियारीन, हिंगलाजइन, कंकालिन माता, हरदेव, दूल्हा देव, माडीया आदि प्रकार के देवताओं का पूजा रचना करते हैं। सभी ओझाओं के पास समान रूप से पवित्र देवताओं में धरती माता, चंद्र देवता, सूर्य देवता, पवन देवता, जल देवता, अग्नि देवता, पर्वत आत्मा देवता शामिल रहते हैं।


आदिवासी ओझा भगत

आदिवासी ओझा माता



प्रसिद्ध ओझा(famous ojha shamans) भगत के नाम- 


1. भोलानाथ बांसडोला(नेपाल) 

2. अंजा नोर्मन्न (स्वीडन) 

3. राम सिंह नेताम ओझा(छत्तीसगढ़,भारत) 

4. वेरा सकीना, (साइबेरिया) 

5. ढोलू उइके ओझा ,(भारत)





ओझा किस कैटेगरी (ojha caste category) में आते हैं ? 


अनुसूचित जनजाति में 1,000 से अधिक जाति सम्मिलित है, उनमें से एक है ओझा अत्यंत पिछड़े जनजाति इसी को ध्यान में रखते हुए सरकारी नौकरी में लाभ मिले, सरकारी शिक्षा में लाभ, तमाम सरकारी योजनाओं में लाभ ले सके। इसलिए अनुसूचित जनजाति के लिस्ट में ओझा जाति को भी सम्मिलित किया गया है अर्थात  इन्हें आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe, ST) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।


ओझा जातियों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर विजिट करते रहिए और नए-नए जानकारी हासिल करते रहे। सभी अनुसूचित जनजाति आदिवासी ओझा भाइयों तक इस जानकारी को शेयर करें व्हाट्सएप,फेसबुक के माध्यम से सभी तक महत्वपूर्ण जानकारी को पहुंचाएं धन्यवाद।


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adivasi ojha culture and tradition in hindi | आदिवासी ओझा जनजाति की सांस्कृतिक विशेषताएं

bisau netam March 22, 2022
 
आदिवासी ओझा जनजाति की सांस्कृतिक विशेषताएं 


आज के इस आर्टिकल में मै आदिवासी ओझा जनजातियों के विभिन्न संस्कारों के बारे में विस्तार से वर्णन करूंगा। यदि पोस्ट पसंद आता है या जानकारी में कहीं त्रुटि हुई है तो आप हमें कमेंट करके सुझाव दे सकते हैं। अच्छा लगे तो हमारे आदिवासी ओझा भाइयों तक इस पोस्ट को व्हाट्सएप,फेसबुक के माध्यम से जरूर शेयर कर सकते हैं समाज के विकास में एक शेयर एक कमेंट का योगदान हम चाहते हैं जय मंशु ओझा! जय सेवा!

आदिवासी ओझा  समाज




        1.जन्म संस्कार

शिशु जन्म को ओझा जनजातियों में प्राकृतिक घटना माना जाता है। ओझा जनजाति यह भी मानते हैं कि यह हमारे पूर्वज दादा परदादा का अवतार है या दादी दादी की अवतार है। गोंड इसे दुल्हादेव एवं झलना देवी की अनुकंपा या आशीर्वाद मानते हैं। 

2.नामकरण- बच्चे का नामकरण जीवन का पहला संस्कार होता है। 

यह संस्कार अलग जनजातियों में अलग - अलग अवधियो में संपन्न किया जाता है प्राय: ओझा जातियों में गर्मियों के समय में व्यस्तता कम होती है ऐसे समय को चुनते है संस्कार सम्पन्न किया जाता है। छत्तीसगढ़ी में इसे छठी भी कहते हैं और ओझा भाषा में इसे मनखे जनिस कहते हैं। बच्चे का नाम नदी या पहाड़ दिन, महीना, ऋतू या किसी विशिष्ट अवसर के नाम पर रखा जाता है- जैसे नरबदिया, बुधिया, वैशाली या अंकालू  आदि।


आदिवासी ओझा जाति में विवाह कैसे और कितने प्रकार से होते हैं? 

  1. विवाह पद्धतियां 

आदिवासी ओझा जनजाति में एक विवाह (मोनोगैमी)और बहु विवाह (पोलोगैमी) दोनों विद्यमान है। 

सामान्यत:इनमें बहु विवाह अधिक प्रचलित है। बहु विवाह का आर्थिक स्थिति से सीधा संबंध होता है आदिवासी जनजातियों में बिंझवारो के मुखिया वालों के मुख्य पांच या छ:पत्नियां भी रख लेते हैं। 

इनमें मुख्यतः क्रय विवाह, सेवा विवाह, अपहरण विवाह, गंधर्व विवाह, हट विवाह,एवं विनिमय विवाह की पद्धतियां पाई जाती है। सामान्य विवाह को बस्तर में पेडुल कहा जाता है। 




adivasi ojha culture and tradition

2.दूध लौटावा 

मैं ममरे-फूफरे, भाई-बहनों में विवाह अधिमान्य होता है। जब लड़की का विवाह कहीं नहीं होता है, तब उसके पास प्रथा अनुसार बुआ या मामा के लड़के से विवाह का विकल्प सुरक्षित रहता है। 

3.सेवा विवाह- 

अधिकांश ऐसे व्यक्ति, जो वधू मूल्य चुकाने में असमर्थ होते हैं, वह एक निश्चित अवधि सामान्यतः 5 वर्षों तक भावी  ससुर के घर रहकर कार्य करते हैं। 

4.क्रय विवाह - 

आदिवासी ओझा जातियों में खास करके महाराष्ट्र में वधू मूल्य देकर पत्नी प्राप्त करने की प्रथा है।  जिसे पारिंग धन भी कहते हैं। 


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विस्तृत जानकारी के लिए नेक्स्ट पार्ट के इंतजार कीजिए। तब तक के टेलीग्राम चैनल में हमें फॉलो कर सकते हैं फेसबुक पर फॉलो कर सकते हैं व्हाट्सएप में शेयर कर सकते हैं बहुत-बहुत धन्यवाद पढ़ने के लिए। 


आने वाले लेख में आपको बाकी जो विवाह के प्रक्रिया है उसके बारे में जानकारी दी जाएगी, धर्म, उत्सव, जनजाति युवा ग्रह, घोटुल प्रथा के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेंगे। जनजातियों के लोकनाट्य कौन-कौन से होते हैं वह समाज के कौन से संगीत होते हैं इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी तब तक के लिए धन्यवाद।








आदिवासी ओझा समाज के लिए सराहनीय कार्य ,माधव सहकारिता बैंक ने आदिवासी ओझा असहाय लोगों को कंबल दान किया

bisau netam January 29, 2022

 

आदिवासी ओझा समाज



वर्तमान परिस्थिति और बदलते मौसम को देखते हुए माधव सहकारिता बैंक की ओर से ओझा समाज के असहाय लोगों को कंबल फ्री में उपलब्ध करा कर मानवता की एक नई मिसाल पेश की है। 


वैसे लोग जो लाचार, बेबस व गरीब होने के कारण इस कड़ाके की ठंड में किसी तरह अपना जीवन गुजर बसर कर रहे हैं। उनलोगों को चिन्हित कर कम्बल का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय मे ठंड का प्रकोप ओर ज्यादा बढ़ने की संभावना है। जिसके कारण माधव सहकारिता बैंक वस्त्र वितरण कार्यक्रम के तहत गरीब,निशाहय लोगों को कम्बल वितरण किया जा रहा है। इसी कार्यक्रम के तहत

माधव सहकारिता बैंक की ओर से ओझाढाना बैतूल मध्यप्रदेश मे गरीब आदिवासी ओझा समाज के लोगो को कम्बल वितरण किया गया । 



समाज सेवा में सुनील जी अहाके, असाडू उइके, मनोहर धुर्वे, बंटी अहाके, मोहित धुर्वे आप लोग समाज सेवा में लगे रहते है ।  आपको आदिवासी ओझा परिवार की ओर से बहुत बहुत बधाई ।

आदिवासी ओझा समाज के लिए मनोहर धुर्वे  हमेशा से आगे बढ़ाने के प्रयास में लगे रहते हैं इसी कड़ी में माधव सहकारिता बैंक के साथ जुड़कर असहाय लोगों के लिए कंबल की व्यवस्था कराने में कामयाब रहे। 

साथी ओझाढाना बैतूल मध्यप्रदेश में 500 से अधिक मकान है,सभी लोग मेहनत, मजदूरी करके पैसा कमाते हैं और उसे दारू में उड़ा देते हैं। इस गंभीर समस्या को मनोहर धुर्वे कई दिनों से इस समस्या के समाधान  ढूंढने के प्रयत्न में लगे रहे। इस समस्या को बैंक मैनेजर के साथ शेयर किया फिर एक ऐसा योजना लाया जिसमें से 10 ₹20 तक में बैंक में खाता खोलकर बचत योजना के तहत सभी ओझाढाना में जो ओझा निवासरत है बैंक में हर महीना जमा करते हैं और इससे उनके जो दारू की लत है वह भी दूर हो रही है और साथ में सेविंग भी हो रही है। 

इस शानदार प्रयास के लिए आदिवासी ओझा समाज की ओर से मनोहर धुर्वे जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं। 



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ojha caste in hindi|ओझा अनुसूचित जनजाति

bisau netam January 22, 2022
 छत्तीसगढ़ की ओझा अनुसूचित जनजाति, विशेष परंपराएं, तीज एवं त्यौहार 

बिसाऊ राम नेताम ओझा लेखक की ओर से-ओझा अनुसूचित जनजाति के बारे में कहीं पर लेख नहीं मिलेगा ना ही इंटरनेट में आपको सही और सटीक जानकारी मिलेगी। इस वेबसाइट पर सभी जानकारी सत्यापन कर सभी आंकड़ों का मूल्यांकन कर प्रमाणित जानकारी दी जा रही है। इस वेबसाइट का उद्देश्य ओझा जनजातियों के बारे में लोगों में फैली भ्रांति  को दूर करना उद्देश्य है एवं समस्त भारत में ओझा जनजाति को जागरूक करना एवं संगठित करना। 


छत्तीसगढ़ भाषायी  और सांस्कृतिक विविधता, जनजाति बहुलता और सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से समृद्ध होने के कारण ऐतिहासिक काल से ही विशिष्ट रहा है। 




विश्व के जनजाति मानचित्र में अफ्रीका के बाद भारत में जनजाति जनसंख्या की बहुलता है। इस दृष्टि से राज्य को जनजाति बहुल राज्य भी कह सकते हैं। राज्य की कुल जनसंख्या का 30.6 % जनजाति जनसंख्या है। भारत की कुल जनजाति जनसंख्या का 6.2 %  है। राज्य का सबसे बड़ा जनजाति समूह गोंड  है। 


प्रदेश में क्षेत्र के हिसाब से ओझा जनजाति कहां कहां पाए जाते हैं-
 


उत्तर- पूर्वी क्षेत्र 

इसके अंतर्गत रायगढ़,गरियाबंद  में ओझा जनजातियों का होने का खबर मिली है अभी तक इसमें कोई प्रमाणिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है लेकिन रायगढ़ में ओझा जाति के कुछ लोग बसे हुए हैं यह जानकारी हमारे टीम को अन आधिकारिक रूप से  प्राप्त हुई है। 


मध्यवर्ती क्षेत्र- 

इनमें धमतरी, राजनांदगांव, कवर्धा कुछ ग्राम पंचायतों में इन जिलों में ओझा जनजाति के लोग निवासरत हैं। 


दक्षिणी क्षेत्र- 


दक्षिणी क्षेत्र के अंतर्गत बस्तर ,दंतेवाड़ा तथा कांकेर जिले सम्मिलित हैं। यहां निवास करने वाली जनजातियों में गोंड, हलवा, मारिया, हल्बी, अबूझमाडीया, आदि जनजाति इनके साथ हमारे ओझा जनजाति के लोग भी निवासरत हैं। प्राय: बस्तर संभाग में जहां-जहां जनजाति के लोग हैं वहां ओझा जाति के लोग भी निवासरत हैं। 


ओझा अनुसूचित जनजाति -

ओ+झा 

ओ = हे 

झा= झाड़ फूंक करने वाला 

ओझा- हे झाड़ फूंकने वाला 

इस प्रकार से सभी जनजाति के लोग संबोधन करते थे यह झाड़-फूंक ने वाला यह शब्द बहुत लंबा और बोलने में भी अधिक ऊर्जा लगती है तो इसे ओझा संबोधन करके पुकारने लगे तभी से ओझा शब्द के उत्पत्ति माना जाता है। ओझा समाज के कई बुजुर्गों से संपर्क करने के बाद यह जानकारी और ज्यादा उजागर हुई और आधा से ज्यादा बुजुर्गों का मानना है कि बिल्कुल ओझा शब्द की जो उत्पत्ति है इसी प्रकार से हुई है।

ओझा अपना मूल निवास बस्तर संभाग को मानते हैं उनका मानना है कि ओझा जनजातियों का अस्तित्व महाभारत काल , रामायण काल से मानते हैं। 



और इसकी झलक आपको छत्तीसगढ़ के ओझा  जनजातियों में देखने को भी मिलेगी। सभी घर में ढहकी विशेष तौर से ओझा जनजातियों के घर में होता है, उसके साथ लोगों का मनोरंजन एवं झाड़-फूंक का काम करते हैं। 

जनजाति सांस्कृतिक तत्व- 

जनजाति समाज के अपने अलग नियम और मान्यताएं होती है। प्रदेश के जनजाति सांस्कृतिक तत्वों की प्रमुख विशेषताएं निम्न शीर्षकों में देखी जा सकती है आइए ओझा जनजाति के सांस्कृतिक तत्व के बारे में निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर समझते हैं - 


भाषा 

आदिम जनजातियों की अपनी अलग भाषा (बोली) होती है, जिसे वे आदिकाल से बोलते आ रहे हैं। इनकी भाषा की कोई लिपि नहीं है। ओझा जनजाति के लोग छत्तीसगढ़ी, पारसी, साथी क्षेत्र विशेष के हिसाब से वहां के जनजाति समूह का भाषा भी बोलते हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा पर सीमावर्ती राज्यों की भाषाओं का प्रभाव स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, उड़ीसा, एवं मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में ओझा जाति निवासरत है और इनकी प्रमुख भाषा के रूप में पहचान की जा रही है पारसी और स्थानीय बोली के अनुसार आचार विचार रख रहे हैं।



सामाजिक विशेषताएं-
आदिवासी समाज का संगठन बंधुत्व पर आधारित है। अन्य समाजों की अपेक्षा यह अधिक प्रजातांत्रिक एवं सामाजिक होते हैं।
जनजातीय अर्थव्यवस्था में इनका महत्व पुरुषों से अधिक दिखाई देता है। इनमें संयुक्त एवं व्यक्तित्व दोनों परिवारों की परंपरा होती है, जिसमें टोटम(गढ़ चिन्हा) का विशेष महत्व होता है। समाज में सामुदायिक तक की भावना प्रबल होती है।
युवागृहों : जैसे - घोटूल, घूम कोरिया आदि का महत्वपूर्ण स्थान होता है, जहां युवा आदिवासी जीवन दर्शन की शिक्षा लेते हैं।

गोत्र 

ओझा जनजाति में पूर्वजों का गोत्र अभी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है और ओझा संगठनों का यह मांग है कि उनका गोत्र को सरकारी आंकड़ों में मेंशन किया जाए। पुरवाईया,पखरवाल,मरार,पखिरबाल,भरेवा,सिंगूमारिया, आदि ओझा जाति के गोत्र हैं। जनगणना अधिकारियों के द्वारा शंका होने पर बाकी जनजातियों के गोत्र से ओझा जाति के गोत्र को जोड़ दिया गया और वह आज भी चले आ रहा है जैसे- नेताम, मंडावी, मरावी, भलावी, परते,उइके, मरकाम,आत्रम, कोवा आदि।


राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों के परिजनों का किया अभिनंदन,मध्यप्रदेश

bisau netam October 25, 2021

 राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में शहीदों के परिजनों का किया अभिनंदन,इसी तारतम्य में स्वतन्त्रता संग्राम सैनानी मंशु ओझा के ज्येष्ठ पुत्र श्री सिमरत पाखरेजी  का साल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया ।


आदिवासी ओझा समाज के इतिहास, संस्कृति,भाषा बोली, को समझने के लिए इस वेबसाइट पर बहुत सारे आर्टिकल उपलब्ध है आप सभी को बारीकी से अध्ययन करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं सभी ओझा समाज के पास यह जानकारी शेयर कीजिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

आदिवासी ओझा समाज द्वारा बालपुर ,सरोरा (mp) में बैठक आयोजित किया गया ।

bisau netam October 03, 2021

 2 अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर आदिवासी ओझा  समाज ऑनलाइन परिचय यात्रा द्वारा बालपुर सरोरा में सामाजिक बैठक आयोजित किया गया। 




सभी समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा किया गया। आदिवासी ओझा समाज के शिक्षा के क्षेत्र में एवं आर्थिक क्षेत्र में विशेष जोर देने की बात कही गई, 

सभी सम्मानित पदाधिकारियों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में विशेष तौर से जोर दिया गया। 

साथ ही गांधी जयंती के अवसर पर गांधीजी के सिद्धांत एवं अहिंसा के मार्ग को अपनाने के लिए कहा गया। 

छुआछूत,सामाजिक दूरियां इन बिंदुओं को विशेष तौर से जोर दिया गया सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के बारे में समाज के लोगों को जागरूक करें।

साथी राष्ट्रीय स्तर के समिति गठन के संबंध में भी विशेष रूप से चर्चा किया गया एवं सभी सामाजिक बंधुओं द्वारा इस फैसले पर निर्णय लिया गया कि सभी राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की गठन जल्द से जल्द होनी चाहिए। 



आदिवासी ओझा सामाजिक पदाधिकारी के द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया- 

  • आदरणीय कमलेश उइके  एवं दौलतराम उइके  द्वारा कर्मचारी संगठन बनाने की बात कही गई। जोकि कर्मचारी संगठन द्वारा आने वाले पीढ़ी को प्रेरित करने का काम एवं समाज को नई दिशा एवं निर्देश देने के काम करेंगे। 
  • आदरणीय मूलचंद मरार द्वारा सभी कर्मचारियों को ऑनलाइन परिचय यात्रा द्वारा गूगल मीट में सम्मिलित होने की बात कही गई। 

गांधीजी जयंती के अवसर पर आयोजित ओझा समाज बैठक में उपस्थित थे स्वतंत्र संग्राम सेनानी मंशु ओझा  के सुपुत्र इमरत पाखरे जी एवं इसी आदरणीय क्रम में बैतूल  घोड़ाडोंगरी से उपस्थित रहे  मूलचंद मरार, साहब मरार, मुन्नालाल मरार, प्रेम मरार,साहबू मरार, अंगद मरार,रमेश पाखरे,इमरत पाखरे,अमर दास पाखरे, एवं विशेष रूप से सम्माननीय क्रम में कलावती पाखरे जी, सिमरत पाखरे ,मुनिया बाई मरार जी महिला सदस्य भी उपस्थित रहे, साथी सुनील पाखरे अंकित पाखरे, कमल मरार, विनोद सोनवानी, सुरेंद्र सोनवानी, सुना भाई गुड हरिया,  मीटिंग में उपस्थित रहे। 

साथी मंडला जिला से कमलेश कुमार उइके , नंदकिशोर मरावी, कृष्ण कुमार उइके, लक्ष्मी उइके, भारत पर्ते।  

बालाघाट से सुखदेव कुमरे, सुमरन  पटवारी,कर्म सिंह मंडावी। 


विशेष आभार एवं धन्यवाद के पात्र हैं आयोजक समिति के पदाधिकारी अमन सिंह उइके ,छब्बिलाल उइके ,दौलत उइके,दस्सी भलावी,करण सिंह उइके,सुरेश सिंह उइके,बिरझू उइके,देवेन्द्र उइके,भवानी उइके,प्रकाश उइके,श्रीमती  देवकला उइके पत्नी  (स्व.अन्तुलाल उइके )  बालपुर ,सरोरा, के सामाजिक भाइयों द्वारा सफल मीटिंग आयोजन करने के लिए धन्यवाद के पात्र हैं ।

बिसाऊ ओझा - संचालक ओझा समाज (छत्तीसगढ़)🙏इन्हीं शुभकामनाओं के साथ समस्त ग्रामवासियों एवं ओझा भाइयों को मेरी ओर से बहुत-बहुत हार्दिक  बधाइयां एवं शुभकामनाएं😊

 


छत्तीसगढ़ आदिवासी ओझा जनजाति के बारे में जाने 😐

bisau netam September 28, 2021

 आदिवासी अनुसूचित जनजाति ओझा जाति  

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पहले एक ही राज्य  थे । छत्तीसगढ़ राज्य 1 नवंबर 2000 को अलग होकर अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत  42 जाति आते हैं । छत्तीसगढ़ में आदिवासी ओझा के बारे में बात  किया जाए तो 42 अनुसूचित जनजाति के सूची में 16वे नंबर पर आता है । नाम कुछ इस प्रकार से है -

  • 16.गोंड; अरख, अर्रख, अगरिया, असुर, बदी मारिया, बड़ा मारिया, भटोला, भीम, भूता, कोइलभुट्टा, कोलिभुती, भर, बिसनहोर मारिया, छोटा मारिया, डंडिया मारिया, धुर्वा, धोबा, धुलिया, डोरला, गिकी, गट्टा, गट्टा, गट्टा , गीता, गोंड, गौरी हिल मारिया, कंदरा, कलंगा, खटोला, कोइरा, कोयरा, खिरवार, कुचरा मारिया, कुचिया मारिया, मडिया, मारिया, मैना, मनेवर, मोग्या, मोगिया, मंधिया, मुड़िया, मुरिया, नगरची, नागवंशी , ओझा, राज गोंड,सोनझरी, झरेका, थटिया, थोडा, वेड मारिया, वेड मारिया, दारोई


छत्तीसगढ़ में आदिवासी ओझा  जनजाति कौन - कौन से जिले में हैं ? 

छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से एवं  जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए तो कांकेर जिले में सर्वाधिक ओझा जाति के लोग निवासरत हैं कोंडागांव , राजनांदगांव , नारायणपुर, जगदलपुर ,कवर्धा ,गरियाबंद ,बीजापुर ,बस्तर संभाग में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ में आदिवासी ओझा  जनजाति  के लोग निवासरत हैं।16वे नंबर पर प्रमुख रूप से  गोंड जनजाति है फिर जितने भी गोंड जाति के साथ जुड़े हुए हैं वह गोंड के उपजाति कहलाते हैंअत: आदिवासी ओझा जाति भी गोंड की उपजाति है

आदिवासी ओझा  जनजाति आदिवासी में आते हैं कि नहीं? 

ओझा जाति और ओझा गोत्र में बहुत अंतर है बहुत लोग कंफ्यूज हो जाते हैं। जो पहली बार सुनते हैं वह आदिवासी ओझा को ब्राह्मण समझ लेते हैं।मैं यहां पर स्पष्ट कर देना चाहता हूं ब्राह्मण के कास्ट ब्राह्मण होते हैं।और उनके गोत्रावली ओझा लिखते हैं,जैसे कि फेमस क्रिकेटर है प्रज्ञान ओझा तो वह ओझा आदिवासी नहीं है। वह एक ब्राह्मण है  आदिवासी ओझा के संस्कृति भाषा बोली सब बाकी जो अनुसूचित जनजाति के संस्कृति होती है,रीति- रिवाज होती है वैसे ही होती हैं।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम, 1976 के अनुसार और 2000 के अधिनियम 28 द्वारा डाला गया है।
इसलिए आदिवासी ओझा जाति अनुसूचित जनजाति में आते हैंसरकार के जितने भी अनुसूचित जनजाति से संबंधित छुट ,आरक्षण एवं सरकारी योजनाएं हैं सभी के लाभ ओझा जाति के लोग लेते हैं


छत्तीसगढ़ ओझा जनजाति के संस्कृति भाषा बोली कैसे होती है ? 

आदिवासी ओझा जाति के लोग भी बाकी अनुसूचित जनजाति के जातियों की तरह गोंडी ,पारसी,हल्बी  इत्यादि भाषा , बोली बोलते हैं प्रमुख रूप से देखा जाए तो आदिवासी ओझा जाति के जो बोली होती है वह पारसी होती हैयही उनकी पहचान होती है 
आदिवासी महिला एवं पुरुष दोनों ही अपने हाथ एवं पैरों में गोदना गोदवाते हैं श्रृंगार की दृष्टि से देखा जाए तो अधिकांश महिलाएं गोदना के माध्यम से श्रृंगार करती हैं एवं बाकी अनुसूचित जनजातियों के महिलाओं को  गोदने का काम करते हैं मुख्य रूप से जो अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को गोदने का जो काम होता है वह आदिवासी ओझा महिलाओं के द्वारा किया जाता है पुरानी परंपराएं अनुसार यदि आदिवासी महिलाएं गोदना नहीं गोदवाते हैं तो उनके श्रृंगार अधूरी मानी जाती है ।आज भी ओझा जाति के महिलाओं द्वारा गोदना कार्य किया जा रहा है

                                         

आदिवासी ओझा समाज के मुख्य संस्कृति है ढाहकी बजाके लोगों को मनोरंजन करना।आदि अनादि काल से चली आ रही है आदिवासी के पारंपरिक संस्कृति में से एक है ओझा ढाहकी गीत। राजा महाराजाओं के जमाने में राजा के दरबारों में आदिवासी ओझा जनजातियों के माध्यम से मनोरंजन किया जाता था। फिर अंग्रेजों के साथ युद्ध के दरमियान भी क्रांतिकारी सेनाओं को मनोरंजन करने का काम आदिवासी ओझा जनजातियों के द्वारा किया गया है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें मध्यप्रदेश बेतुल घोड़ाडोंगरी स्वतंत्र सेनानी 👉मंशु ओझा 






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